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GIFT – AMIT MAMGAIN

क्या कमाल की थी वो ! उस लड़की की कल्पना भी उसके जैसी ही क्यूट और यूनिक थी उसके सपनों और ख्वाहिशों की अपनी एक अलग ही दुनिया थी, जहाँ सभी कुछ मुमकिन था. उसकी दुनिया इस दुनिया से बिलकुल अलग और बेहद खूबसूरत थी. लड़की अपनी इस काल्पनिक दुनिया को लेकर हमेशा बड़ी सीरियस रहती थी. उसे अपनी अजीबोगरीब ख्वाहिशों पर पूरा विश्वास था. वो उस लड़के को जब भी अपना कोई सपना सुनाती, तो ये जरूर कहती,
“देखना एक न एक दिन ये जरूर होगा”. लड़का वैसे तो उसकी कई बातों को मजाक में उड़ा दिया करता था लेकिन वो लड़की की इन इल्लॉजिकल बातों पर हमेशा चुप सा रहता था, जैसे कि उसे भी लड़की की ही तरह उसकी काल्पनिक दुनिया पर पूरा यकीन हो. दुनिया में वो लड़का ही एकमात्र ऐसा शख्स था जिसके सामने लड़की बिना हिचके अपने मन की सभी परते खोल दिया करती थी. उसे ये यकीन था कि बाकी लोगों की तरह लड़का कभी ये नहीं कहेगा कि ये क्या बचकानी बातें कर रही हो तुम।
वो शायद मार्च का कोई दिन रहा होगा. दोनों बैठे थे छोटे शहर के एक रेस्टोरेंट में. लड़की एक बात को लेकर बड़ी एक्साइटेड थी. उसने पिछली रात एक नयी अंग्रेजी स्टोरी पढ़ी थी जिसमें एक आदमी एक ऐसे कमरे की छानबीन करता है जिसके दरवाजे को खोलते ही इंसान अनन्त में चला जाता है और फिर वहां से वापस नहीं लौटता।
उस कहानी के बारे में लड़के को बताते हुए लड़की ने कहा, “जानते हो ये कहानी तो अभी पढ़ी है, लेकिन मै ऐसा बचपन से सोचती हॅेू। मैं तो अब भी जब कभी सो कर उठती हूँ और अपने बाथरूम में जाती हूँ तो मुझे हमेशा लगता है कि बाथरूम के दीवारों में कोई सीक्रेट दरवाजा खुलेगा, और उस दरवाजे के दूसरी तरफ कोई अनजानी दुनिया होगी और मैं उस दुनिया में जाऊँगी, मैं नयी नयी दुनिया घूमूँगी फिर वहाँ से घूम फिर कर जब वापस इस दुनिया में आऊँगी उस सीक्रेट दरवाजे से, तो सबको अपने अनुभव बताती फिरुॅंूगी।
“तुम भी चलोगे क्या मेरे साथ कभी घूमने वहाँ?” लड़की ने लड़के से पूछा
सच में अब बोलो, चलोगे?
लड़का कुछ पल को तो कुछ बोल ही नहीं सका. बस टकटकी लगाये लड़की को देख रहा था, और लड़की अब तक उसके जवाब का इंतजार कर रही थी जैसे मानो उन्हें सच में दूसरी दुनिया में जाना ही हो.
हाँ, चलो चलते हैं लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा.
लेकिन लड़के को वापस जवाब देने के बजाये वो अचानक चुप सी हो गयी. कुछ देर यूँ ही कहीं अनजानी सी जगह पर उसकी नजरें टिकी रही, फिर बिना कुछ बोले वह अपनी कापी में कुछ लिखने लगी. लड़का अब भी बस उसे देखे जा रहा था. वो समझ गया था, इस समय उसके साथ होकर भी वह कहीं बहुत दूर अपनी दुनिया में गुम हो चुकी थी। कापी में लिखते लिखते वो बहुत हल्के से कुछ बोल भी रही थी. लड़के ने उससे कुछ पूछने की कोशिश की तो बहुत सख्त नजरों से उसे घूर कर उसने उसे चुप रहने का इशारा कर दिया हार कर लड़के ने शांत रहने में ही अपनी भलाई समझी।
सहसा लड़की उत्साह में बोली “हो गया सब इंतजाम अब बस बता दो कब चलना है मेरे साथ”
लड़का जानता था उससे कुछ भी पूछना बेकार है क्योंकि लड़की जिस मूड में थी, वो लाख कोशिश कर ले तो भी वह उसे कुछ नहीं बताएगी इस लिए वह बस चुपचाप लड़की को कॉफी का सिप लेते देख रहा था. कैफे में एक गाना बज रहा था जिसे धीमे धीमे लड़की भी गुनगुना रही थी।
आ कहीं दूर चले जाएं हम
दूर इतना कि हमें छू न सके कोई गम
फूलों और कलियों से महके हुए एक जंगल में
इक हसीं झील के साहिल पे हमारा घर हो
ओस में भीगी हुई घास पे हम चलते हों।
रंग और नूर में डूबा हुआ हर मंजर हो।

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